कांग्रेस में उठापटक: सोनिया-प्रियंका दे सकती हैं इस्तीफा, फैसला आज शाम चार बजे
पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में इस्तीफे की पेशकश प्रियंका गांधी की ओर से भी हो सकती है। क्योंकि प्रियंका गांधी पार्टी की न सिर्फ राष्ट्रीय महासचिव है बल्कि उत्तर प्रदेश में चुनाव की मुहिम में सबसे आगे रहीं थीं।पांच राज्यों में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस अब आत्ममंथन कर रही है। आज शाम चार बजे से कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक होनी है। अनुमान लगाया जा रहा है इस बैठक में सोनिया गांधी अपने इस्तीफे की पेशकश करेंगी। अगर सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर इस्तीफे की पेशकश पर आम सहमति बनती है तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे या मुकुल वासनिक को फिलहाल पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष (वर्किंग प्रेसिडेंट) बनाया जा सकता है। चर्चा इस बात की भी है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के इतिहास में अब तक के सबसे बुरे प्रदर्शन के बाद पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी भी अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर सकती हैं।
नीतियों से लेकर कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
पिछले कुछ चुनावों में कांग्रेस की हो रही लगातार हार से कांग्रेस नेतृत्व पर लगातार सवालिया निशान उठते रहे हैं। यह सवालिया निशान सिर्फ पार्टी नेतृत्व पर ही नहीं बल्कि उनकी नीतियाें, रणनीतियों और पूरी कार्यप्रणाली पर उठे हैं। 2022 के विधानसभा चुनावों में पांच राज्यों में हुई करारी हार के बाद कांग्रेस आलाकमान रविवार शाम चार बजे कांग्रेस वर्किंग कमेटी की आपातकालीन बैठक बुला रहा है।
पिछले कुछ चुनावों में कांग्रेस की हो रही लगातार हार से कांग्रेस नेतृत्व पर लगातार सवालिया निशान उठते रहे हैं। यह सवालिया निशान सिर्फ पार्टी नेतृत्व पर ही नहीं बल्कि उनकी नीतियाें, रणनीतियों और पूरी कार्यप्रणाली पर उठे हैं। 2022 के विधानसभा चुनावों में पांच राज्यों में हुई करारी हार के बाद कांग्रेस आलाकमान रविवार शाम चार बजे कांग्रेस वर्किंग कमेटी की आपातकालीन बैठक बुला रहा है।
पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बैठक से पहले चर्चा इस बात की हो रही है कि संभवत: सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दें।
ढर्रा नहीं बदला तो पार्टी के अस्तित्व पर खड़े होंगे सवाल
कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कहते हैं कि आने वाले कुछ दिनों में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव है। उसके बाद 2023 में भी कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री कहते हैं अगर कांग्रेस ने अपना ढर्रा नहीं बदला तो पार्टी के अस्तित्व पर ही बहुत बड़ा सवाल खड़ा होने लगेगा। वो कहते हैं कि पार्टी को जो भी निर्णय लेना होगा वह 2024 के लोकसभा चुनाव और इसी दरमियान होने वाले अलग-अलग राज्यों के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के भी लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर के ही फैसला लेना होगा और टीम को मजबूत करना होगा
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